अब सूचना का अधिकार (RTI) भी महंगा

 

महाराष्ट्र में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत जानकारी प्राप्त करना अब महंगा होने जा रहा है। राज्य सरकार ने इस कानून से जुड़े नियमों में संशोधन किया है।

नए अधिसूचित महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम, 2026 के तहत आवेदन शुल्क 10 रुपये से बढ़ाकर 30 रुपये कर दिया गया है, जबकि दस्तावेजों की प्रतियां प्राप्त करने की लागत 2 रुपये प्रति पृष्ठ से बढ़ाकर 5 रुपये प्रति पृष्ठ कर दी गई है। ये नियम 12 जून को अधिसूचित किए गए।

राज्य सरकार का कहना है कि ये संशोधन पारदर्शिता बढ़ाने और RTI आवेदनों की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से किए गए हैं।

मुख्य बदलावों में RTI आवेदन के लिए 150 शब्दों की सीमा तय करना और एक आवेदन में केवल एक ही विषय शामिल करने की शर्त शामिल है। यदि आवेदन में कई विषय होंगे तो सूचना अधिकारी केवल पहले विषय पर ही जवाब देंगे।

अब प्रत्येक आवेदन के साथ स्वप्रमाणित (Self-attested) फोटो पहचान पत्र संलग्न करना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य फर्जी आवेदनों पर रोक लगाना है।

सरकारी कार्यालयों में मूल रिकॉर्ड का निरीक्षण करने वाले नागरिकों को पहले की तरह पहला घंटा मुफ्त मिलेगा, लेकिन उसके बाद हर अतिरिक्त घंटे के लिए 50 रुपये शुल्क देना होगा। पहले गरीबी रेखा से नीचे (BPL) आने वाले लोगों को जानकारी मुफ्त मिलती थी, लेकिन अब उन्हें केवल पहले 50 पन्ने मुफ्त मिलेंगे।

निरीक्षण के दौरान आवेदक केवल पेंसिल का उपयोग कर सकेंगे और दस्तावेजों पर कोई निशान नहीं लगा सकेंगे। अन्य लिखने वाले उपकरण सूचना अधिकारी के पास जमा कराने होंगे।

हालांकि जानकारी को स्वप्रेरित रूप से सार्वजनिक न करना अब स्पष्ट रूप से कर्तव्य में लापरवाही माना जाएगा और संबंधित कार्यालय प्रमुख के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है। ई-मेल या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दी गई जानकारी को अब अधिनियम के तहत वैध सूचना वितरण माना जाएगा।

नियमों के अनुसार अब शुल्क UPI या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से भी जमा किया जा सकेगा, जिससे केवल शुल्क जमा करने के लिए सरकारी कार्यालय जाने में लगने वाला समय बचेगा। यदि दस्तावेज दो दिन पहले जमा कर दिए गए हों और सुविधा उपलब्ध हो, तो अपीलकर्ता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी उपस्थित हो सकेंगे।

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